निम्न रक्तचाप या लो ब्लड प्रेशर - लक्षण व घरेलू उपचार ( low blood pressure synonyms and prevention )
निम्न रक्तचाप या लो ब्लड प्रेशर - लक्षण व घरेलू उपचार ( low blood pressure synonyms and prevention )
हमारी सोसायटी में हाई ब्लड प्रेशर को काफी सीरियसली लिया जाता है, लेकिन लो ब्लड प्रेशर पर लोग अक्सर ध्यान नहीं देते। जबकि सच्चाई यह है कि कई बार यह दिल के गंभीर रोग की वजह बन जाता है।
लो ब्लड प्रेशर ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को मस्तिष्क तक पहुंचने से रोकता है। इसलिए इसे हल्के में न लें। 65 साल से अधिक उम्र के 15-20 प्रतिशत लोग इससे ग्रस्त रहते हैं।
लो ब्लड प्रेशर को डॉक्टरी भाषा में हाइपो टेंशन कहते हैं। दुनिया की बहुत बड़ी आबादी को इसने प्रभावित किया हुआ है, लेकिन अक्सर लोगों को यह पता नहीं होता कि वह लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं।
वैसे लो ब्लड प्रेशर अपने आपमें कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह शरीर में पल रही किसी गंभीर बीमारी जैसे हृदय रोग, तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
लो ब्लड प्रेशर के लक्षण (symptoms of low blood pressure) -
लो ब्लडप्रेशर के मरीजों को आमतौर पर चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा आना, कुछ पल के लिए बेहोशी (सिनकोपल अटैक) आना आदि प्रमुख लक्षण हैं।
● ऐसे मरीज के हाथ-पैर ठंडे रहते हैं।
● हार्ट में मिस्ड बीट्स भी महसूस की जा सकती है।
● हार्ट के डॉक्टर इस तरह के मरीजों के चेकअप में ब्लडप्रेशर में काफी डिफरेंस पाते हैं। वहीं अगर मरीज लेटा हो, बैठा हो और बाद में खड़ा हो, तो उसके ब्लडप्रेशर में काफी बदलाव आ जाता है।
● हार्ट में मिस्ड बीट्स भी महसूस की जा सकती है।
● हार्ट के डॉक्टर इस तरह के मरीजों के चेकअप में ब्लडप्रेशर में काफी डिफरेंस पाते हैं। वहीं अगर मरीज लेटा हो, बैठा हो और बाद में खड़ा हो, तो उसके ब्लडप्रेशर में काफी बदलाव आ जाता है।
● छाती में दर्द, सांस फूलना, अनियमित धड़कनें, तेज बुखार, गर्दन का अकड़ जाना, अगर ज्यादा लंबे समय तक लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो उल्टी और डायरिया भी हो सकती है, बेहोशी, अत्यधिक थकान, कुछ समय के लिए धुंधला या कुछ दिखाई न देना।
क्या होता है लो ब्लड प्रेशर ( caused to low blood pressure) -
● गर्भावस्था, हार्मोन असंतुलन जैसे कि थायरॉइड की सक्रियता कम हो जाना
● डायबिटीज या लो ब्लड शुगर, दवाओं का प्रभाव, हृदय की असामान्य धड़कनें, हार्ट फेलियर, रक्त नलिकाओं का फैल जाना
● स्ट्रोक, लीवर की बीमारियां
● कुछ अत्यावश्यक विटामिनों जैसे बी-12 और आयरन की कमी एनीमिया का कारण बन सकती है, जो लो ब्लड प्रेशर में बदल सकता है।
● इसके अलावा पानी या खून की कमी, उलटियां, डेंगू-मलेरिया, हार्ट प्रॉब्लम, सदमे, इन्फेक्शन, ज्यादा मोशन आने, शरीर से ज्यादा खून बह जाने, लंग या फेफड़ों के अटैक से, हार्ट का वॉल्व खराब हो जाने के अलावा कई दवाओं से भी बीपी लो जाता है।
● गर्भावस्था, हार्मोन असंतुलन जैसे कि थायरॉइड की सक्रियता कम हो जाना
● डायबिटीज या लो ब्लड शुगर, दवाओं का प्रभाव, हृदय की असामान्य धड़कनें, हार्ट फेलियर, रक्त नलिकाओं का फैल जाना
● स्ट्रोक, लीवर की बीमारियां
● कुछ अत्यावश्यक विटामिनों जैसे बी-12 और आयरन की कमी एनीमिया का कारण बन सकती है, जो लो ब्लड प्रेशर में बदल सकता है।
● इसके अलावा पानी या खून की कमी, उलटियां, डेंगू-मलेरिया, हार्ट प्रॉब्लम, सदमे, इन्फेक्शन, ज्यादा मोशन आने, शरीर से ज्यादा खून बह जाने, लंग या फेफड़ों के अटैक से, हार्ट का वॉल्व खराब हो जाने के अलावा कई दवाओं से भी बीपी लो जाता है।
शरीर के अंदरूनी अंगों में खून का रिसाव, पौष्टिक खाने की कमी व खाने-पीने में अनियमितता बरतना भी लो बीपी की वजह हो सकती हैं। अचानक सदमा लगना, कोई भयावह दृश्य देखने या खबर सुनने से भी लो बीपी हो सकता है।
◆ क्या करें जब ब्लडप्रेशर लो ( what do for low blood pressure )
● तुरंत बैठ या लेट जाएं, मुट्ठियां भींचें/ बांधें खोलें, पैर हिलायें।
● मरीज को नमक का पानी दें और डायबिटीज न हो, तो शक्कर दें।
● दवाओं का साइड इफेक्ट हो, तो हॉस्पिटल ले जाना ही उचित होगा। वहां इंट्राविनस फ्लुइड दिए जा सकते हैं व डॉक्टर की निगरानी में वेसोकंसट्रिक्टर दिए जा सकते हैं।
● हार्ट की स्पीड की अनियमितता व दूसरी बीमारियों के लिए हार्ट चिकित्सक का परामर्श आवश्यक है।
● मरीज को नमक का पानी दें और डायबिटीज न हो, तो शक्कर दें।
● दवाओं का साइड इफेक्ट हो, तो हॉस्पिटल ले जाना ही उचित होगा। वहां इंट्राविनस फ्लुइड दिए जा सकते हैं व डॉक्टर की निगरानी में वेसोकंसट्रिक्टर दिए जा सकते हैं।
● हार्ट की स्पीड की अनियमितता व दूसरी बीमारियों के लिए हार्ट चिकित्सक का परामर्श आवश्यक है।
◆ निम्न रक्तचाप से बचाव कैसे करें ( prevention of low blood pressure)
● जब लेटे हों तो सीधे उठकर खड़े न हों। पहले बैठें, कुछ सेकेंड रुकें, फिर उठकर खड़े हों।
● कम से कम आठ गिलास पानी और तरल पदार्थ रोज पिएं।
● खाने में नमक की मात्र बढ़ा दें।
● डॉक्टर की सलाह से खाने के साथ एक कप चाय या कॉफी पिएं।
● अगर आप हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं ले रहे हैं तो शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर दें।
● अगर खाने के बाद ब्लड प्रेशर कम हो जाता है तो थोड़ी मात्र में खाएं। दिन में तीन बार अधिक मात्र में खाने की बजाए छह बार थोड़ी मात्र में खाएं। खाने के बाद थोड़ा आराम करें। भोजन में काबरेहाइड्रेट की मात्र कम कर दें।
इन बातों पर भी ध्यान दें
● पोस्टुरल हाइपोटेंशन सुबह के समय ज्यादा होता है, क्योंकि रातभर में शरीर में सोडियम (नमक) की मात्र कम हो जाती है।
● पोस्ट प्रनडियल हाइपोटेंशन खाने के बाद होता है। खाना खाने के बाद रक्त में ग्लूकोज की मात्र अचानक बढ़ जाती है। ऐसे लोग भोजन में काबरेहाइड्रेट का सेवन कम करें।
● हाइपरवोलेमिया के कारण भी यह हो सकता है। इसमें तरल पदार्थो की कमी हो जाती है।
● डायलिसिस कराने या डायबिटीज का उपचार कराने से भी यह समस्या हो सकती है।
● कम से कम आठ गिलास पानी और तरल पदार्थ रोज पिएं।
● खाने में नमक की मात्र बढ़ा दें।
● डॉक्टर की सलाह से खाने के साथ एक कप चाय या कॉफी पिएं।
● अगर आप हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं ले रहे हैं तो शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर दें।
● अगर खाने के बाद ब्लड प्रेशर कम हो जाता है तो थोड़ी मात्र में खाएं। दिन में तीन बार अधिक मात्र में खाने की बजाए छह बार थोड़ी मात्र में खाएं। खाने के बाद थोड़ा आराम करें। भोजन में काबरेहाइड्रेट की मात्र कम कर दें।
इन बातों पर भी ध्यान दें
● पोस्टुरल हाइपोटेंशन सुबह के समय ज्यादा होता है, क्योंकि रातभर में शरीर में सोडियम (नमक) की मात्र कम हो जाती है।
● पोस्ट प्रनडियल हाइपोटेंशन खाने के बाद होता है। खाना खाने के बाद रक्त में ग्लूकोज की मात्र अचानक बढ़ जाती है। ऐसे लोग भोजन में काबरेहाइड्रेट का सेवन कम करें।
● हाइपरवोलेमिया के कारण भी यह हो सकता है। इसमें तरल पदार्थो की कमी हो जाती है।
● डायलिसिस कराने या डायबिटीज का उपचार कराने से भी यह समस्या हो सकती है।
ये भी जाने -
● हार्ट अटैक के कारण बीपी लो हो तो जीभ के नीचे रखने वाली सॉरबिट्रेट जैसी नाइट्रेट बेस्ड दवाएं न दें। इनसे बीपी और लो हो सकता है। उस वक्त सिर्फ डिस्प्रिन की गोली ही दें।
● हार्ट व हाई बीपी की ज्यादातर दवाएं ज्यादा मात्रा में लेने पर बीपी लो कर देती हैं। डिप्रेशन की दवाएं और पेनकिलर्स ज्यादा लेने और ज्यादा शराब पीने से भी बीपी लो हो सकता है।
● यह कहना सही नहीं है कि शुगर की वजह से बीपी लो हो जाता है। दरअसल, पेशाब लाने की दवाएं लेने पर शुगर के मरीजों में बीपी लो हो सकता है, इंसुलिन या शुगर की बाकी दवाओं से नहीं।
● यौन शक्ति बढ़ानेवाली वायग्रा जैसी दवाएं इस्तेमाल करने वाले लोग अगर नाइट्रेट बेस्ड सॉबिर्ट्रेट जैसी दवाएं भी साथ में लेते हैं तो उससे खतरनाक तरीके से बीपी लो हो सकता है।
● अगर माता-पिता दोनों को बीपी की शिकायत हो तो कई बार उनके बच्चों में बीपी काफी हाई (170 तक भी) होने पर भी लक्षण प्रकट नहीं हो पाते। ऐसे में प्रॉपर चेक करवाएं।
● आम धारणा है कि लो बीपी को ठीक करने के लिए ताकत की दवाई या टॉनिक लेने चाहिए या फिर ऐसे लोगों को घर काम काम नहीं करना चाहिए, लेकिन यह सच नहीं है।
● हार्ट व हाई बीपी की ज्यादातर दवाएं ज्यादा मात्रा में लेने पर बीपी लो कर देती हैं। डिप्रेशन की दवाएं और पेनकिलर्स ज्यादा लेने और ज्यादा शराब पीने से भी बीपी लो हो सकता है।
● यह कहना सही नहीं है कि शुगर की वजह से बीपी लो हो जाता है। दरअसल, पेशाब लाने की दवाएं लेने पर शुगर के मरीजों में बीपी लो हो सकता है, इंसुलिन या शुगर की बाकी दवाओं से नहीं।
● यौन शक्ति बढ़ानेवाली वायग्रा जैसी दवाएं इस्तेमाल करने वाले लोग अगर नाइट्रेट बेस्ड सॉबिर्ट्रेट जैसी दवाएं भी साथ में लेते हैं तो उससे खतरनाक तरीके से बीपी लो हो सकता है।
● अगर माता-पिता दोनों को बीपी की शिकायत हो तो कई बार उनके बच्चों में बीपी काफी हाई (170 तक भी) होने पर भी लक्षण प्रकट नहीं हो पाते। ऐसे में प्रॉपर चेक करवाएं।
● आम धारणा है कि लो बीपी को ठीक करने के लिए ताकत की दवाई या टॉनिक लेने चाहिए या फिर ऐसे लोगों को घर काम काम नहीं करना चाहिए, लेकिन यह सच नहीं है।
◆ ऐसे लोगों को हो सकता है निम्न रक्तचाप -
महिलाओं में 15 से 40 तक की उम्र में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन की वजह से बीपी कम पाया जाता है, पर उसे लो नहीं माना जाता क्योंकि ऐसा हार्मोंस की वजह से होता है। ऐसी महिलाओं में बीपी 100 /60 या 100 /65 तक हो सकता है।
मेनोपॉज या रजोनिवृत्ति के बाद उन्हीं महिलाओं में बीपी बढ़ने के चांस हो जाते हैं क्योंकि ये हार्मोंस उस उम्र में बनना कम हो जाते हैं। तब नीचे वाला बीपी 90 से ऊपर व ऊपर वाला बीपी 150 से 160 तक हो सकता है। इसके लिए जांच करवाकर दवा लेनी चाहिए।
● जो लोग खिलाड़ी हैं या अच्छी-खासी एक्सरसाइज करते हैं, उनका बीपी आमतौर पर कम ही मिलता है। इसे बीमारी नहीं माना जा सकता।
◆ खानपान
● पालक, मेथी, घीया, टिंडा व हरी सब्जियां लें।
● अनार, अमरूद, सेब, केला, चीकू व अंगूर खाएं।
● कॉलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ न हो तो थोड़ा-बहुत घी, मक्खन व मलाई खाएं।
● केसर, दही, दूध और दूध से बने पदार्थ खाएं।
● सेंधा नमक का इस्तेमाल करें।
● सेब, गाजर या बेल का मुरब्बा चांदी का वर्क लगाकर खाएं।
● पालक, मेथी, घीया, टिंडा व हरी सब्जियां लें।
● अनार, अमरूद, सेब, केला, चीकू व अंगूर खाएं।
● कॉलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ न हो तो थोड़ा-बहुत घी, मक्खन व मलाई खाएं।
● केसर, दही, दूध और दूध से बने पदार्थ खाएं।
● सेंधा नमक का इस्तेमाल करें।
● सेब, गाजर या बेल का मुरब्बा चांदी का वर्क लगाकर खाएं।
◆ लो ब्लड प्रेशर से बचाव कैसे करें ?
स्मोकिंग से परहेज करें, एक्टिव रहें और ज्यादा टेंशन न करें तो लो बीपी से बचा जा सकता है।
◆ लो ब्लड प्रेशर का उपचार -
● सबसे जरूरी है कारणों का पता लगाना, ताकि ठीक तरह से उपचार किया जाए। अगर किसी दवा से लो ब्लड प्रेशर हो तो उसकी वैकल्पिक दवाई दी जा सकती है।
● अगर एड्रीनल ग्लैंड के काम न करने से लो ब्लड प्रेशर है तो आपको हार्मोन रिप्लेसमेंट की आवश्यकता पड़ेगी।
● अगर एड्रीनल ग्लैंड के काम न करने से लो ब्लड प्रेशर है तो आपको हार्मोन रिप्लेसमेंट की आवश्यकता पड़ेगी।
◆ लो ब्लड प्रेशर का घरेलू उपचार -
● जो लोग लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं उन्हें नमक ज्यादा खाना चाहिए।
● अगर आपको लगातार चक्कर आ रहे हों तो पानी ज्यादा पिएं।
● एक कप शकरकंद का जूस दिन में दो बार पिएं। यह लो ब्लड प्रेशर का सबसे अच्छा घरेलू उपचार है।
● मिट्टी के बर्तन में 32 किशमिश भिगोएं। बर्तन को पानी से पूरा भर दें। सुबह खाली पेट उन्हें एक-एक कर चबाएं, उसके बाद पानी पी लें।
● तुलसी की 10-15 पत्तियों का रस निकाल लें और उसे एक चम्मच शहद के साथ खाली पेट खा लें।
● सात बादाम को रातभर भिगोएं। उसका छिलका उतारकर पीस लें और दूध में थोड़ी देर उबाल लें। इसे गुनगुने रूप में ही प्रयोग करें।
● रात को पांच बादाम भिगोकर सुबह खाली पेट एक बादाम व एक काली मिर्च लेकर दो से तीन मिनट तक चबाकर खाएं। बाकी बादामों को भी इसी तरह खाएं। 15-20 मिनट बाद नाश्ता कर सकते हैं।
● गाय या बकरी का एक पाव दूध, दो चम्मच गाय का घी, काली मिर्च के 10 दाने और 10 ग्राम मिश्री को उबालकर इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पीएं। शुगर के मरीज मिश्री व शहद न लें।
● हर रोज गाय के दूध के साथ एक-दो सिंघाड़े खाएं।
● रात को दो-तीन अंजीर भिगोकर सुबह खाएं। शुगर के मरीज सिर्फ एक अंजीर भिगोकर लें।
● रात को दो-तीन अंजीर भिगोकर सुबह खाएं। शुगर के मरीज सिर्फ एक अंजीर भिगोकर लें।
● एक बड़ी इलायची व पुदीने के थोड़े-से पत्तों को उबाल कर उसका पानी पीएं। चाय में डालकर भी पी सकते हैं।
इनमें से कोई एक उपाय करें।
इनमें से कोई एक उपाय करें।
◆ लो ब्लड प्रेशर का आयुर्वेदिक इलाज -
● सिद्धमकरध्वज की खुराक मरीज की हालत के मुताबिक वैद्य से बनवाकर लें।
● वृह्दवातचिंतामणि रस की आधी-आधी गोली सुबह-शाम दूध से लें।
● योगेंद्र रस की आधी गोली पानी से दिन में एक बार लें।
(सिद्धमकरध्वज, वृह्दवातचिंतामणि रस व योगेंद रस, ये तीनों दवाएं बहुत ज्यादा बीपी लो होने पर सिर्फ वैद्य की देखरेख में ही लेनी चाहिए।)
● चार रत्ती या आधा छोटा चम्मच अश्वगंधा चूर्ण या दो रत्ती ताप्यादि लौह या दो रत्ती प्रवाल पिष्टी (प्रवाल पिष्टी कैल्शियम बढ़ाती है) या चार रत्ती आंवला चूर्ण या कामदुधा रस की गोली दो रत्ती पानी से लें।
● दो चम्मच अश्वगंधारिष्ट बराबर पानी मिला कर सुबह-शाम लें।
● दो छोटी चम्मच बलारिष्ट या अर्जुनारिष्ट आधे कप पानी से लें।
● शुगर के मरीज अर्जुन की छाल का दो चम्मच चूर्ण पानी में उबाल लें। फिर छानकर पीएं।
● शुगर के मरीज अश्वगंधा का पाउडर आधा छोटा चम्मच पाउडर पानी से लें या एक-एक गोली सुबह-शाम लें।
● वृह्दवातचिंतामणि रस की आधी-आधी गोली सुबह-शाम दूध से लें।
● योगेंद्र रस की आधी गोली पानी से दिन में एक बार लें।
(सिद्धमकरध्वज, वृह्दवातचिंतामणि रस व योगेंद रस, ये तीनों दवाएं बहुत ज्यादा बीपी लो होने पर सिर्फ वैद्य की देखरेख में ही लेनी चाहिए।)
● चार रत्ती या आधा छोटा चम्मच अश्वगंधा चूर्ण या दो रत्ती ताप्यादि लौह या दो रत्ती प्रवाल पिष्टी (प्रवाल पिष्टी कैल्शियम बढ़ाती है) या चार रत्ती आंवला चूर्ण या कामदुधा रस की गोली दो रत्ती पानी से लें।
● दो चम्मच अश्वगंधारिष्ट बराबर पानी मिला कर सुबह-शाम लें।
● दो छोटी चम्मच बलारिष्ट या अर्जुनारिष्ट आधे कप पानी से लें।
● शुगर के मरीज अर्जुन की छाल का दो चम्मच चूर्ण पानी में उबाल लें। फिर छानकर पीएं।
● शुगर के मरीज अश्वगंधा का पाउडर आधा छोटा चम्मच पाउडर पानी से लें या एक-एक गोली सुबह-शाम लें।
◆ नेचरोपैथी से करें लो ब्लड प्रेशर का इलाज -
तौलिया या किसी और कपड़े को सादे पानी में भिगोकर निचोड़ लें। चार उंगल चौड़ी पट्टी बनाएं। चटाई बिछाकर उस पर पट्टी फैला दें और खुद उस पर लेट जाएं। 10 मिनट तक लेटे रहें। ध्यान रहे कि पट्टी उतनी ही चौड़ी हो, जो रीढ़ की हड्डी को ही लंबाई में कवर करे, पूरी कमर को नहीं। यह लो व हाई बीपी, दोनों में फायदेमंद है। इससे थोड़ी देर में ही बीपी सामान्य हो जाएगा। इसे दिन या रात में किसी भी वक्त कर सकते हैं लेकिन सोते वक्त करना बेहतर है। लगातार 45 दिन करें।
◆ योग से करें निम्न रक्तचाप का इलाज -
लो बीपी में ये आसन व क्रियाएं फायदेमंद हैं -
● अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका व उज्जायी प्राणायाम करें। कपालभाति क्रिया, उत्तानपादासन, कटिचक्रासन, पवनमुक्तासन, नौकासन, मंडूकासन और लेटकर साइकिलिंग करें।
● अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका व उज्जायी प्राणायाम करें। कपालभाति क्रिया, उत्तानपादासन, कटिचक्रासन, पवनमुक्तासन, नौकासन, मंडूकासन और लेटकर साइकिलिंग करें।
◆ एक्यूप्रेशर से लो ब्लड प्रेशर का इलाज -
लो ब्लड प्रेशर से बचने और उसका इलाज करने के लिए नीचे लिखे पॉइंट्स दबाए जा सकते हैं। एक पॉइंट एक बार में पांच-सात मिनट तक दबाना चाहिए। दबाते वक्त सहने लायक प्रेशर होना चाहिए। पॉइंट्स खाली पेट या खाना खाने के एक घंटे बाद दबाने चाहिए। दिन में तीन बार तक ऐसा कर सकते हैं।
ये पॉइंट्स हैं -
● लोकल हार्ट पॉइंट -
हथेली और अंगूठे के जुड़ने की लाइन से डेढ इंच नीचे यह पॉइंट एक वर्ग इंच लंबा-चौड़ा है।
हथेली और अंगूठे के जुड़ने की लाइन से डेढ इंच नीचे यह पॉइंट एक वर्ग इंच लंबा-चौड़ा है।
● लीवर-3 -
यह पैर के अंगूठे और पहली उंगली के बीच से ढाई उंगली ऊपर है। यह लो व हाई बीपी, थायरॉयड, शुगर और पाचन की समस्या में असरदार है।
यह पैर के अंगूठे और पहली उंगली के बीच से ढाई उंगली ऊपर है। यह लो व हाई बीपी, थायरॉयड, शुगर और पाचन की समस्या में असरदार है।
● के-3 -
टखने के अंदर की तरफ मौजूद यह पॉइंट किडनी के फंक्शन को सुधारता है। किडनी बीपी को मेंटेन करने में भूमिका निभाती है।
टखने के अंदर की तरफ मौजूद यह पॉइंट किडनी के फंक्शन को सुधारता है। किडनी बीपी को मेंटेन करने में भूमिका निभाती है।
● पी-6 -
यह पॉइंट हथेली वाली साइड में कलाई के समाप्त होने से तीन उंगली नीचे है।
यह पॉइंट हथेली वाली साइड में कलाई के समाप्त होने से तीन उंगली नीचे है।
● एच-3
यह पॉइंट कुहनी के अंदर की तरफ होता है
यह पॉइंट कुहनी के अंदर की तरफ होता है
लो बीपी या हाइपोटेंशन को आमतौर पर लोग गंभीरता से नहीं लेते। साथ ही, इसे लेकर तमाम गलतफहमियां भी हैं। सही तरीके से इलाज न होने पर लो बीपी कई समस्याओं की वजह बन सकता है।